
लूटने हमको आया कोई सात समंदर पार से,
कोई घोड़े पे बैठ कर हाथ मे तलबार से!
बहा दिए लहू के दरियें,छोड़ा ना हौसला हम ने,
वो कुछ ना कर सके, डटे रहे हम तूफान में!
कुछ चड़ गये हँस-हँस के फासी, कुछ ने खाई लाठिया,
कितनो को मारा उन्होने, अपने हथियार से!
हर कोई कर देता, अपना सीना गर्व से आगे,
कोई साथ रहा तो, कही डूब गये अपनो की मौत से!
झलक गये आँखो से पैमाने ,बने जब दो वतन,
फिर लड़ पड़े हम हिंदू मुस्लिम के नाम से!
आज हिंद के दिल का दुकडा पकिस्तान हो गया,
उसी की चोटों से हिंद का दिल बरबाद हो गया!
कहा से कहा आ गए सोचते है बैठ के,
मन भर जाए, ग़म से पार डटे रहे हम तूफ़ान से!
कही किसी की नज़र ना लग जाए आज की फ़िज़ा को,
हर देशबासी बधा रहे, एक दूजे के हाथ से!!
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